सरकारी राशि की लूट का पर्दाफाश: IAS डॉ. एस सिद्धार्थ की सख्त कार्रवाई, चार अधिकारी सस्पेंड
पटना। शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर सरकारी राशि की लूट हुई है। लूट पर अब कार्रवाई शुरू हो गई है। IAS डॉ. एस सिद्धार्थ ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कई जिलों में बेंच-डेस्क खरीद से लेकर अन्य योजनाओं में अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी राशि का बंदरबांट का मामला पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने के लिए IAS डॉ. एस सिद्धार्थ ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई किशनगंज के DM की रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है।
कार्रवाई का विस्तार
कार्रवाई के दायरे में आए चार अधिकारियों में शामिल हैं:
- सुभाष कुमार गुप्ता: तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी, किशनगंज (वर्तमान में गोपालगंज के जिला शिक्षा पदाधिकारी)
- मोतिउर रहमान: वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी, किशनगंज
- राजेश कुमार सिंह: जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना)
- सूरज कुमार झा: जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान
इन सभी अधिकारियों पर एक समान आरोप लगे हैं, जिसमें सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितता और नियमों की अनदेखी शामिल है। शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन सुबोध कुमार चौधरी ने इन अधिकारियों के निलंबन का पत्र जारी किया है।
घोटाले की व्यापकता
किशनगंज के अलावा, बिहार के कई अन्य जिलों में भी सरकारी राशि के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आई हैं। विशेषकर, सरकारी स्कूलों में बेंच-डेस्क की खरीद में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है। मोतिहारी में भी लैब और अन्य योजनाओं में भारी धांधली की गई है। सरकारी राशि के दुरुपयोग के इन मामलों में संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत पाई गई है।
जांच रिपोर्ट के खुलासे
किशनगंज के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी सुभाष कुमार गुप्ता की संदिग्ध भूमिका के चलते उन्हें भी निलंबित किया गया है। किशनगंज के DM ने 21 जून 2024 को शिक्षा विभाग को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में बरती गई अनियमितताओं का विवरण था। इस जांच के लिए उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की गई थी।
जांच रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
जांच रिपोर्ट में कई अनियमितताएं उजागर हुईं:
- बेंच डेस्क योजना: इसमें वित्तीय अनियमितता और नियमों की अनदेखी पाई गई।
- विद्यालय जीर्णोद्धार: निर्माण कार्यों में घोटाले की पुष्टि हुई।
- ICT लैब की स्थापना: लैब्स की स्थापना में अनियमितता पाई गई।
- नाइट गार्ड की बहाली: भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी।
- पेयजल योजना और हाउसकीपिंग योजना: वेंडर चयन और भुगतान में अनियमितताएं।
विभाग की प्रतिक्रिया
शिक्षा विभाग ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए निलंबन आदेश जारी किए हैं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना बिहार में शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करती है और इसे रोकने के लिए उठाए गए कदमों की एक महत्वपूर्ण मिसाल है।
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