पप्पू यादव के आवास पर आधी रात पुलिस की दस्तक, 35 साल पुराने केस ने फिर पकड़ा तूल

पप्पू यादव के आवास पर आधी रात पुलिस की दस्तक, 35 साल पुराने केस ने फिर पकड़ा तूल

पटना। पटना में शुक्रवार देर रात उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई, जब पुलिस की एक टीम पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के मंदिरी स्थित आवास पर पहुंची। मामला करीब 35 वर्ष पुराने एक विवाद से जुड़ा है, जिसमें पटना की विशेष अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पप्पू यादव समेत चार आरोपियों की संपत्ति को अटैच और जब्त करने का आदेश दिया है।


कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस टीम रात करीब साढ़े दस बजे सांसद के आवास पर पहुंची और उन्हें अपने साथ चलने को कहा। हालांकि, इस कार्रवाई का मौके पर ही तीखा विरोध देखने को मिला। पप्पू यादव के समर्थक बड़ी संख्या में उनके घर के बाहर जुट गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया, जिससे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया।


बताया जा रहा है कि पप्पू यादव उसी दिन दिल्ली से पटना लौटे थे। पुलिस के पहुंचते ही उन्होंने रात में जाने से इनकार कर दिया और कहा कि वह सुबह सहयोग के लिए तैयार हैं। सांसद ने यह भी कहा कि जिन मुद्दों को वह लगातार उठा रहे हैं, यह कार्रवाई उसी का परिणाम है।


इस दौरान पप्पू यादव ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वारंट और सादे कपड़ों में आधी रात को पुलिस भेजना कानून के शासन के खिलाफ है। उन्होंने आशंका जताई कि यह कार्रवाई उन्हें डराने या नुकसान पहुंचाने की मंशा से की जा सकती है। पूरे घटनाक्रम के बाद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार और प्रशासन से जवाब मांगा। उनके पोस्ट के बाद मामला और अधिक राजनीतिक रंग लेता नजर आया।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, यह विवाद वर्ष 1995 से जुड़ा है। विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति ने गर्दनीबाग थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पप्पू यादव और उनके सहयोगियों ने उनका मकान किराए पर लेते समय यह बात छिपाई कि उसका उपयोग कार्यालय के रूप में किया जाएगा। इसी मामले में कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, जिसके बाद अब संपत्ति जब्ती का आदेश जारी हुआ है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और सांसद के विरोध के बाद स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। मामले ने एक बार फिर बिहार की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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BIHAR - JHARKHAND