राज्यसभा जाने के ऐलान के बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री पर मंथन तेज, कई फॉर्मूले चर्चा में
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर राज्यसभा जाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग रहेगा। इस घोषणा के बाद लगभग तय माना जा रहा है कि राज्य की राजनीति में एक लंबे दौर का अंत हो रहा है और अब यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार की कमान किसके हाथ में होगी।
नीतीश कुमार के फैसले के बाद सियासी हलकों में कई तरह के समीकरणों और संभावित चेहरों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनेगा या फिर जनता दल (यू) का ही कोई नेता इस पद की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके साथ ही यह चर्चा भी चल रही है कि क्या चार दशक बाद बिहार को कोई सवर्ण मुख्यमंत्री मिल सकता है।
राजनीतिक गलियारों में फिलहाल सत्ता को लेकर दो प्रमुख फॉर्मूले की चर्चा तेज है। पहला फॉर्मूला यह है कि यदि भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है तो जदयू के दो नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। वहीं दूसरा फॉर्मूला यह बताया जा रहा है कि यदि मुख्यमंत्री जदयू का रहता है तो भाजपा के दो उपमुख्यमंत्री होंगे। इन दोनों संभावनाओं पर गठबंधन के भीतर मंथन जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व खासकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही यह संकेत दे चुके थे कि यदि नीतीश कुमार चाहें तो अपनी पसंद के किसी नेता का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए आगे कर सकते हैं। बताया जाता है कि 20 नवंबर 2025 को गांधी मैदान में शपथ ग्रहण से पहले भाजपा की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया था कि नीतीश कुमार जिस व्यक्ति का नाम सुझाएंगे, भाजपा उसे मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार कर सकती है।
हालांकि उस समय नीतीश कुमार और उनके रणनीतिकारों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उनका तर्क था कि विधानसभा चुनाव में जनता ने जनादेश नीतीश कुमार के नाम पर दिया है, इसलिए मुख्यमंत्री भी वही बनेंगे। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और सरकार का गठन हुआ।
लेकिन पिछले कुछ समय से नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अब जदयू के कई नेता यह मांग कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी नीतीश कुमार के ही किसी करीबी या उनकी पसंद के नेता को दी जाए। पार्टी के भीतर इस बात पर भी चर्चा चल रही है कि नया चेहरा ऐसा हो, जो गठबंधन के सभी घटकों को स्वीकार्य हो और सरकार की स्थिरता बनाए रख सके। इसी बीच भाजपा और जदयू दोनों ही दलों में संभावित नामों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक तस्वीर और साफ हो सकती है तथा बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।
About The Author
