1.44 करोड़ के सोना लूटकांड में गया जीआरपी के पूर्व थानाध्यक्ष भेजे गए जेल
गया। हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस में हुए 1.44 करोड़ रुपये के सोना लूटकांड ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सनसनीखेज मामले में गया रेलवे पुलिस थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि जिस अधिकारी पर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही पूरे लूटकांड की योजना रच रहा था।
एसआईटी जांच में खुला राज
इस हाई-प्रोफाइल मामले की निगरानी पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे थे। रेल एसपी इनामुल हक के नेतृत्व में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे कांड की परतें खोलीं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन और अन्य डिजिटल सबूतों से यह स्पष्ट हुआ कि लूट की साजिश में तत्कालीन थानाध्यक्ष की सीधी भूमिका थी।
8 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तारी
जांच के दौरान संदेह गहराने पर राजेश कुमार सिंह को पहले निलंबित किया गया था। इसके बाद पुलिस मुख्यालय, पटना में विशेष टीम ने उनसे करीब आठ घंटे तक गहन पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में वे कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अंततः उन्हें हिरासत में लेकर पटना रेल न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।
चलती ट्रेन में हुई थी करोड़ों की लूट
पूरा मामला 21 नवंबर का है, जब हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे कोलकाता के एक स्वर्ण व्यापारी के कूरियर बॉय धनंजय शाश्वत से लगभग एक किलो वजन के तीन सोने के बिस्कुट छीन लिए गए थे। आरोप है कि गया जीआरपी के चार जवानों और दो सिविलियन युवकों ने जांच के बहाने उसे रोका, सोना छीना और ट्रेन से उतार दिया। लूटे गए सोने की कीमत करीब 1.44 करोड़ रुपये आंकी गई।
पहले दबाने की कोशिश, फिर मचा हड़कंप
घटना के बाद पीड़ित के मालिक ने पहले कोलकाता में मामला दर्ज कराया था। केस जब बिहार रेल पुलिस तक पहुंचा, तो गया रेल थाना में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोप है कि शुरुआत में मामले को दबाने की कोशिश भी हुई, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला डीजीपी तक पहुंच गया। इसके बाद उच्च स्तर पर जांच शुरू हुई और पूरा सच सामने आने लगा।
खुद थानाध्यक्ष ने दर्ज की थी एफआईआर
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सोना लूटकांड में लिखित बयान लेकर प्राथमिकी दर्ज करने वाला अधिकारी खुद राजेश कुमार सिंह था। बाद में जब वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच की, तो खुलासा हुआ कि पूरी साजिश का सूत्रधार वही था।
चार सिपाही पहले ही निलंबित
इस मामले में गया रेल थाना के चार सिपाही—करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजन कुमार और आनंद मोहन—पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं। अब थानाध्यक्ष की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि लूटकांड में पूरा नेटवर्क सक्रिय था।
रेल पुलिस में मचा हड़कंप
रेल एसपी इनामुल हक ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच में तत्कालीन थानाध्यक्ष की संलिप्तता प्रमाणित हुई है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। इस खुलासे के बाद रेल पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और आगे और गिरफ्तारियों की भी संभावना जताई जा रही है।
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