बिहार पुलिस को अब मिलेगा डिजिटल वारंट...कुर्की का ऑर्डर
पटना में 25 हजार पुलिसकर्मियों को दी जा रही ट्रेनिंग
बिहार पुलिस द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:
- स्थान और अवधि: पटना के बापू सभागार में आयोजित, तीन दिनों तक चलने वाला कार्यक्रम।
- प्रशिक्षण प्राप्तकर्ता: 25 हजार पुलिसकर्मी तीन अलग-अलग चरणों में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
- वेब कास्टिंग: बिहार के लगभग सभी जिलों के एक तिहाई अनुसंधानकर्ता और सुपरवाइजिंग ऑफिसर वेब कास्टिंग के माध्यम से शामिल।

पटना(अमन राज वर्मा)। बिहार पुलिस द्वारा नए कानूनों को लेकर पुलिस पदाधिकारियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम पटना के बापू सभागार में आयोजित किया जा रहा है। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम अगले तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें 25 हजार पुलिसकर्मी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस प्रशिक्षण को तीन अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है ताकि सभी पुलिसकर्मियों को उचित प्रशिक्षण दिया जा सके। इस कार्यक्रम के दौरान वेब कास्टिंग के माध्यम से बिहार के लगभग सभी जिलों के एक तिहाई अनुसंधानकर्ता और सुपरवाइजिंग ऑफिसर भी शामिल हो रहे हैं। यह वेब कास्टिंग प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि दूर-दराज के जिलों के अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण का हिस्सा बन सकें। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 1 जुलाई से लागू होने वाले नए कानूनों के बारे में गहन और विस्तृत जानकारी प्रदान करना है। इन नए कानूनों में भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 शामिल हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के डीजीपी आरएस भट्टी ने किया। उन्होंने उद्घाटन समारोह में इन नए कानूनों के महत्व और उनके प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये नए कानून पुलिस की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव लाएंगे और कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगे। डीजीपी भट्टी ने इस बात पर जोर दिया कि इन कानूनों को सही तरीके से समझना और उन्हें प्रभावी रूप से लागू करना पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी है। प्रशिक्षण के दौरान, विशेषज्ञों द्वारा पुलिसकर्मियों को नए कानूनों के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी जा रही है। भारतीय न्याय संहिता 2023 में अपराध और दंड से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करती है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 साक्ष्य के संग्रहण और उसके प्रस्तुतिकरण के नियमों को निर्धारित करता है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से, पुलिसकर्मियों को इन कानूनों के सही अनुप्रयोग और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के बारे में शिक्षित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि पुलिस बल नए कानूनों के अनुसार कार्य कर सके और कानून व्यवस्था को और भी अधिक प्रभावी बना सके। यह प्रशिक्षण न केवल कानूनों की जानकारी बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि पुलिसकर्मियों को उनके कर्तव्यों को और अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाने के लिए भी प्रेरित करेगा। अंत में, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन बिहार पुलिस के कार्यप्रणाली में सुधार लाने और जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया है। नए कानूनों की प्रभावशीलता और उनके सही अनुपालन के माध्यम से, बिहार पुलिस कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
अधिक जानकारी के लिए PDF डाउनलोड करें : https://www.sonvarshavani.com/media/2024-06/10-39-12-amspeech-draft.pdf

बिहार पुलिस के प्रशिक्षण कार्यक्रम के अतिरिक्त बिंदु:
- डिजिटल उपकरण: पुलिस पदाधिकारियों को स्मार्ट फोन और लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएंगे।
- विधि विज्ञान का प्रयोग: प्रशिक्षण में सिखाया जाएगा कि अनुसंधान के समय विधि विज्ञान का कैसे प्रयोग किया जा सकता है।
- डिजिटल पुलिसिंग: डिजिटल पुलिसिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- साक्ष्य संकलन: गंभीर अपराध के घटनास्थल पर उपलब्ध साक्ष्य को संकलित करने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
- वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी: घटनास्थल की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के सही तरीकों का प्रशिक्षण।
- विशेषज्ञों की मौजूदगी: विधि विज्ञान के विशेषज्ञ पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देंगे।
- डिजिटलाइजेशन: पुलिस का डिजिटलाइजेशन पूरा हो चुका है और सीसीटीएनएस को जल्द ही आईसीजेएस से जोड़ने की योजना है, जिससे पुलिस पूरी तरह से डिजिटल हो जाएगी।
- अनुसंधान में सहूलियत: स्मार्ट फोन और लैपटॉप से अनुसंधान कर्ताओं को काम करने में सहूलियत होगी।
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