कोलकाता रेप-मर्डर केस: साइकोलॉजिकल टेस्ट आज, केंद्र का सख्त आदेश- राज्यों को हर दो घंटे में देनी होगी कानून व्यवस्था की रिपोर्ट

कोलकाता रेप-मर्डर केस: साइकोलॉजिकल टेस्ट आज, केंद्र का सख्त आदेश- राज्यों को हर दो घंटे में देनी होगी कानून व्यवस्था की रिपोर्ट

कोलकाता। कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए रेप और मर्डर केस ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना के विरोध में देशभर में डॉक्टरों का प्रोटेस्ट लगातार 9वें दिन (18 अगस्त) भी जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आरोपियों की जांच तेज कर दी है और आज आरोपी संजय का साइकोलॉजिकल टेस्ट किया जा रहा है, जिससे घटना के समय की स्थिति और अपराध में शामिल अन्य लोगों का पता चल सके।

केंद्र सरकार का सख्त कदम

इस घटना के मद्देनजर केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के लिए एक सख्त आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि अब हर राज्य को हर दो घंटे में अपने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की स्थिति की रिपोर्ट गृह मंत्रालय के कंट्रोल रूम को भेजनी होगी। यह रिपोर्ट फैक्स, ई-मेल या वॉट्सऐप के माध्यम से भेजी जाएगी। यह कदम सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि देश में कहीं भी ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों और कानून-व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी जा सके।

कोलकाता पुलिस का कड़ा रुख

कोलकाता पुलिस ने इस केस में शामिल हर संदिग्ध पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। भाजपा की पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी को पुलिस ने नोटिस जारी किया है और उन्हें ट्रेनी डॉक्टर की पहचान उजागर करने के आरोप में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इसके साथ ही आरजी कर अस्पताल के डॉक्टर कुणाल सरकार और डॉ. सुबर्नो गोस्वामी पर केस को लेकर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया गया है।

प्रदर्शन और हिंसा का असर

14 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई हिंसा के बाद कोलकाता पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक 32 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा, अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के आसपास की सुरक्षा को बढ़ाते हुए धारा 163 (पहले CRPC की धारा 144) लागू कर दी गई है, जिसमें अगले 7 दिनों तक (24 अगस्त तक) किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन पर रोक रहेगी। इस दौरान 5 से अधिक लोगों के एकत्रित होने और हथियार लेकर चलने पर भी पाबंदी रहेगी।

निर्भया की मां की प्रतिक्रिया

निर्भया कांड की मां ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि 2012 से अब तक कुछ भी नहीं बदला है। उन्होंने ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपने पद का दुरुपयोग कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बजाय मामले को दबाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि इस प्रकार के अपराधों में शामिल लोगों को त्वरित और कठोर सजा दिलाई जाए, ताकि देश में ऐसे जघन्य अपराधों पर रोक लग सके।

महिला सुरक्षा के लिए सरकार के संभावित कदम

इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल सरकार महिला सुरक्षा को लेकर कुछ अहम घोषणाएं कर सकती है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • रात्रि साथी प्रोजेक्ट: अस्पतालों में रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के साथ एक साथी की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे अकेली ड्यूटी पर न रहें।
  • कम नाइट शिफ्ट: महिला डॉक्टरों और नर्सों की नाइट ड्यूटी को कम किया जाएगा और 12 घंटे से अधिक काम करने की अनुमति नहीं होगी।
  • आपातकालीन हेल्पलाइन: महिला सुरक्षा के लिए 100/112 जैसी आपातकालीन हेल्पलाइन शुरू की जा सकती है।
  • सुरक्षा जांच: मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सुरक्षा जांच को और कड़ा किया जाएगा।
डॉक्टरों की हड़ताल का व्यापक असर

डॉक्टरों की हड़ताल से देशभर के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी सर्जरी और इनडोर पेशेंट विभाग (IPD) सेवाएं बंद हैं, जिससे हजारों मरीजों को परेशानी हो रही है। पिछले 6 दिनों में लगभग 6 लाख से अधिक मरीज इलाज नहीं करा सके और 2500 से अधिक सर्जरी भी स्थगित करनी पड़ीं। केंद्र सरकार ने डॉक्टरों की मांगों पर विचार करते हुए एक कमेटी बनाने का आश्वासन दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए एक सशक्त योजना बनाई जा सके। इस घटना ने न केवल कोलकाता बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। जनता और डॉक्टर समुदाय दोनों ही न्याय की मांग कर रहे हैं, और देशभर में इस प्रकार की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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साकेत कुमार, BJMC 

उप-सम्पादक

सोन वर्षा वाणी 

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