वायनाड में लैंडस्लाइड का कहर: पीएम मोदी ने किया हवाई सर्वे
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 10 अगस्त को केरल के वायनाड जिले के लैंडस्लाइड प्रभावित इलाकों का दौरा किया। यह दौरा उस वक्त हुआ जब पूरा क्षेत्र 30 जुलाई को हुई विनाशकारी लैंडस्लाइड के बाद से बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्यों का केंद्र बना हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर से चूरलमाला, मुंडक्कई और पुंचिरीमट्टम गांवों का हवाई सर्वेक्षण किया, जो इस त्रासदी से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। यह वही क्षेत्र है जहां से इरुवाझिनजी पुझा नदी का उद्गम होता है और जहां से तबाही की शुरुआत हुई थी। मोदी का हेलीकॉप्टर वायनाड के कलपेट्टा में स्थित एक स्कूल में उतरा, जहां से वे सड़क मार्ग से प्रभावित इलाकों की ओर रवाना हुए। उन्होंने वहां चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति की समीक्षा की और राहत शिविरों और अस्पतालों में लैंडस्लाइड पीड़ितों से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक कर घटनास्थल की स्थिति और अब तक की बचाव कार्यवाही पर चर्चा की। केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी इस दौरे में प्रधानमंत्री के साथ थे। प्रधानमंत्री के इस दौरे के बाद वायनाड के पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि पीएम मोदी का वायनाड का दौरा स्वागत योग्य कदम है और उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री जब खुद इस तबाही को देखेंगे, तो इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का निर्णय लेंगे। इससे पहले राहुल गांधी ने संसद में भी इस हादसे को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की थी। 30 जुलाई को हुई इस लैंडस्लाइड ने वायनाड को गहरे घाव दिए हैं। अब तक 400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 138 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। 9 दिन तक चले सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 8 अगस्त को सेना वहां से वापस लौट चुकी है, लेकिन NDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है। यह हादसा पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करेंगे। वायनाड में इस विनाशकारी लैंडस्लाइड के बाद, राहत और पुनर्वास कार्यों को तेजी से पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकार, और केंद्र सरकार इस दिशा में प्रयासरत हैं, लेकिन इस त्रासदी से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए और अधिक ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
About The Author
