पटना में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास के बाहर संविदा कर्मचारियों पर लाठीचार्ज
धरना दे रहे थे कर्मचारी, बोले- घर कैसे चलेगा, सरकार बताए
पटना। पटना में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास के बाहर धरना दे रहे संविदा कर्मचारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई कर्मचारी घायल हो गए। ये कर्मचारी सुबह 10 बजे से प्रदर्शन कर रहे थे, जो अपनी नौकरी से हटाए जाने के खिलाफ विरोध जता रहे थे। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने, तो पुलिस को सख्ती दिखानी पड़ी और उन्हें बलपूर्वक हटाया गया।
कर्मचारियों का दर्द: "चार साल से नौकरी कर रहे थे, अब घर कैसे चलेगा?"
अमीन राजीव कुमार सिंह ने बताया, "हम चार साल से बिहार के सभी जिलों में बंदोबस्त कार्यालय में सेवा दे रहे हैं। सरकार ने सर्वेक्षण कार्य पूरा नहीं किया है, फिर भी हमें हटाया जा रहा है। एक तरफ सर्वेक्षण के लिए अमीन की बहाली की बात कही जा रही है और दूसरी ओर पहले से सेवा दे रहे अमीनों को हटा दिया जा रहा है।" राजीव ने सवाल उठाया कि इस परिस्थिति में उनके पास क्या विकल्प है, सरकार बताए।
राजस्व विभाग का पत्र और कर्मचारियों की चिंता
13 जून को राजस्व विभाग ने सभी जिलों के डीएम को पत्र जारी कर इन संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने का आदेश दिया था। इससे हजारों कर्मचारियों के भविष्य पर संकट आ गया है। राजीव ने आगे कहा, "जब 5 पदों के लिए वेकैंसी निकाली गई थी, तो एक पद अमीन अमानत के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है? यह नियम सब पर लागू होना चाहिए।"
अन्याय के खिलाफ आवाज
त्रिभुवन कुमार ने बताया कि कई अमीनों पर सर्वेक्षण के दौरान मुकदमे भी हुए, फिर भी सभी अपने काम में लगे रहे। उन्होंने इलेक्शन ड्यूटी और विधि व्यवस्था से संबंधित ड्यूटी भी निभाई। "आज अचानक सेवा से हटाने का फैसला लिया गया है। इसका विरोध करते हैं, हम 550 अमीन अमानत अपना हक लेकर रहेंगे, चाहे इसके लिए कितना भी संघर्ष क्यों न करना पड़े।"
संविदा पर बहाली का इतिहास
2019 में राजस्व विभाग ने संविदा पर बहाली के लिए 5 पदों के लिए 6875 वैकेंसी निकाली थी, जिसमें अमीन, विशेष सर्वेक्षण कानूनगो, क्लर्क, विशेष सर्वेक्षण अमीन (सिविल इंजीनियर), सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी शामिल थे। अब इन्हीं पदों पर सेवा दे रहे कर्मचारियों को हटाने का फैसला लिया गया है, जिससे उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है। संविदा कर्मचारियों का यह विरोध और लाठीचार्ज की घटना सरकार की नीतियों और निर्णयों पर सवाल खड़े करती है। यह घटना न केवल कर्मचारियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता और निर्णय प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न उठाती है। इन कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें उनकी सेवा का विस्तार दिया जाए और न्याय मिले, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
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