ओल की खेती कर बदला अपनी तकदीर

ओल की खेती कर बदला अपनी तकदीर

हिसुआ (नवादा)। प्रखंड के सिहीन गांव के 14 किसानों ने ओल की खेती को जीवकोपार्जन का माध्यम बनाया। ग्रामीण मोसाफिर कुशवाहा ने बताया कि गांव के डेढè दर्जन लोगों ने ओल उगाने का प्रशिक्षण लिया और दो वर्षों से ओल की खेती में लग गया। ओल की पैदावार से किसानों का तकदीर बदल गया। उनके रहन -सहन का स्तर में काफी सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण लेने के बाद प्रशिक्षित किसान उन्नत प्रभेद के ओल के बीज के लिए समस्तीपुर जिले के पूसा एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय से सम्पर्क किया।  वहॉ सम्पर्क करने पर उन्हें उन्नत किस्म के ओल के बीज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। एक दर्जन प्रशिक्षित किसान पूसा एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय जाकर वहां से उन्नत किस्म का बीज लाया। श्री कुशवाहा ने बताया कि ओर के बीज को खेतो में सितम्बर के महिने में 2020 को लगाया गया था, इसे जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त माह के पहले सप्ताह में उखाड़ा जायेगा तथा सितम्बर माह में खेत की जुताई कर पुन: उसमें ओल के बोज डाला जायेगा। बाजार उपलब्ध नहीं रहने से किसानों को कम किमत पर अपने उत्पाद को लोकल मार्केट में बेचना पड़ता है,  जिससे किसानों को कम मुनाफा होता है। एक कठ्ठा खेत में 12-14 मन ओल की पैदावार होती है। एक कठ्ठा ओल की खेती करने में तकरीबन 250-3000 रूपये पूॅजी लगता है जबिक एक कठ्ठा ओल से किसानों को करीब  8000-10000 रूपये की आमदनी होती है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानिय स्तर पर बाजार उपलब्ध हो तो किसानों को और लाभ मिल सकता था। ओल की फसल करीब एक साल में तैयार हो जाता है। किसी तरह का नहीं मिलता  अनुदान-सिहीन गांव ओल उत्पादन करने वाले किसानों ने कहा कि ओल की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्बारा किसी प्रकार का अनुदान नहीं दिया जाता है, यहां तक कि बीज खरीद करने वाले किसानों ने कहा कि ओल की खेती को बढावा देने के लिए सरकार द्बारा किसी प्रकार का अनुदान नहीं दिया जाता है, यहां तक कि बीज खरीदने में भी कोई छुट सरकार द्बारा नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि ओल की खेती के लिए उभरा जमीन की सतह उभरा होना चाहिए। पानी पड़ने पर खेतों में पानी का जमाव नहीं हो। यदि खेतों में पानी जमा होगा तो ओल का बीज सड़ जायेगा,  जिसका सीधा असर उत्पादन पर पङता हैं। सिहीन गांव के ओल उतपादक किसानों ने कहा कि की ओल की खेती के बढाबा देने के लिए अनुदान और स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सरकार को करने की आवश्यकता है।  

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साकेत कुमार, BJMC 

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