पूर्व सीबीआई डायरेक्टर विजय शंकर का निधन, परिवार ने अंगदान का लिया निर्णय
नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के पूर्व निदेशक विजय शंकर का मंगलवार सुबह ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से पैंक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। 75 वर्षीय विजय शंकर का जीवन देश की सेवा और समर्पण का प्रतीक रहा। उनके निधन के बाद परिवार ने उनकी आखिरी इच्छा का सम्मान करते हुए उनके अंगों को एम्स (AIIMS) को दान करने का निर्णय लिया। परिवार ने कहा कि यह उनके जीवन के उच्च मूल्यों को दर्शाने वाला कदम है।
सीबीआई में अहम योगदान
विजय शंकर ने 2005 से 2008 तक सीबीआई के डायरेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनकी नेतृत्व क्षमता के दौरान सीबीआई ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड, मालेगांव धमाका और मक्का मस्जिद जैसे कई चर्चित मामलों की जांच की। इसके अलावा, उन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम और बॉलीवुड अभिनेत्री मोनिका बेदी के प्रत्यर्पण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दीर्घकालिक प्रशासनिक सेवा
विजय शंकर 1969 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी थे। उन्होंने अपने करियर में राष्ट्रीय आपदा विमोचन, नागरिक सुरक्षा, और होमगार्ड महानिदेशक के तौर पर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। सीबीआई में डायरेक्टर बनने से पहले वह एजेंसी में अतिरिक्त निदेशक भी रह चुके थे। उनकी सेवा के दौरान उन्होंने कई जटिल और संवेदनशील मामलों को सफलतापूर्वक संभाला।
अंतिम दिनों की इच्छाएं
परिवार ने बताया कि विजय शंकर अपनी बीमारी के दौरान भी सकारात्मक और दृढ़ रहे। उन्होंने जीवन के प्रति अपने दृष्टिकोण को अपने अंगदान की इच्छा के माध्यम से व्यक्त किया। उनकी यह अंतिम इच्छा न केवल उनके मानवता के प्रति समर्पण को दर्शाती है, बल्कि समाज में अंगदान के महत्व को भी रेखांकित करती है।
देशभर में शोक की लहर
उनके निधन पर प्रशासनिक और सुरक्षा क्षेत्र में शोक की लहर है। विजय शंकर की सेवाओं को याद करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों और पूर्व सहयोगियों ने उनकी नेतृत्व क्षमता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। उनके परिवार ने उनके निधन पर कहा, "यह हमारे लिए बेहद दुखद घड़ी है। उन्होंने हमेशा देश की सेवा को प्राथमिकता दी और अपने अंतिम दिनों में भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।"
अंगदान: समाज के लिए एक संदेश
विजय शंकर के अंगदान का निर्णय न केवल उनकी महानता को दर्शाता है, बल्कि यह समाज के लिए एक प्रेरणा भी है। उनके इस कदम से कई जरूरतमंद लोगों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है। एम्स ने उनके अंगदान के लिए परिवार का आभार व्यक्त किया है और इसे एक आदर्श उदाहरण बताया है।
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