मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद अपनों की तलाश में भटकते रहे परिजन, अस्पताल परिसर में गूंजती रही चीख-पुकार

मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद अपनों की तलाश में भटकते रहे परिजन, अस्पताल परिसर में गूंजती रही चीख-पुकार

मुजफ्फरपुर। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल अग्निकांड की त्रासदी के बाद अब बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए अस्पताल अग्निकांड ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। गुरुवार तड़के करीब तीन बजे शहर के प्रसाद अस्पताल में लगी भीषण आग ने चार लोगों की जान ले ली, जबकि कई अन्य मरीज झुलस गए। हादसे के बाद अस्पताल परिसर में ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। अपने परिजनों की तलाश में लोग घंटों अस्पताल के बाहर भटकते रहे और कई परिवारों को यह तक पता नहीं चल पा रहा था कि उनके मरीज किस अस्पताल में भर्ती हैं। आग लगने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों को आनन-फानन में दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया। इस दौरान कई परिजन अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर सके, जिससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी और बेचैनी का माहौल बना रहा। रोते-बिलखते परिजन प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से अपने मरीजों के बारे में जानकारी मांगते नजर आए।

मरीज की तलाश में चार घंटे तक भटकता रहा परिवार

मनियारी थाना क्षेत्र निवासी बृजनंदन राय उर्फ विद्या राय के परिजन भी उन्हीं लोगों में शामिल थे जो हादसे के बाद अपने मरीज की तलाश में दर-दर भटक रहे थे। सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए प्रसाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आग लगने के बाद से उनका कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई। बृजनंदन राय की बहू ने रोते हुए बताया कि इलाज के लिए परिवार ने बड़ी मुश्किल से पैसे जुटाए थे। उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती कराने के समय पहले पैसे जमा करने को कहा गया था। परिवार ने जमीन बेचकर इलाज का खर्च जुटाया, लेकिन हादसे के बाद अब उन्हें यह तक जानकारी नहीं मिल पा रही है कि उनके मरीज को कहां ले जाया गया है। परिजनों का आरोप है कि आग लगने के बाद मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भेज दिया गया, लेकिन उनके संबंध में स्पष्ट सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे कई परिवार अपने परिजनों की खोज में घंटों परेशान रहे।

चार लोगों की मौत, कई मरीजों का इलाज जारी

प्रशासन के अनुसार अग्निकांड में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में कृष्णनंदन प्रसाद सिंह (76), गीता देवी (62), शशांक (30) और उदय कुमार (57) शामिल हैं। कई अन्य मरीज धुएं और आग की चपेट में आने से घायल हुए हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। घटना के बाद दमकल विभाग, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं। आग पर काबू पाने के बाद अस्पताल परिसर को खाली कराया गया और मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

स्वास्थ्य मंत्री ने ली घटना की जानकारी

हादसे के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी से फोन पर बातचीत कर पूरी घटना की जानकारी ली। उन्होंने घायलों के समुचित इलाज और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने का निर्देश दिया है।

अस्पताल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का कहना है कि हादसे के दौरान समुचित सूचना और मार्गदर्शन नहीं मिलने से उनकी परेशानी कई गुना बढ़ गई। अब प्रशासन आग लगने के कारणों के साथ-साथ अस्पताल में मौजूद सुरक्षा इंतजामों की भी जांच कर रहा है। मुजफ्फरपुर का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए जीवनभर का दर्द बन गया है, जो अपने प्रियजनों को बचाने और खोजने के लिए घंटों तक अस्पताल परिसर में भटकते रहे।

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Aman Raj Verma Picture

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BIHAR - JHARKHAND