बिहार में भू-माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई: संतोष डॉन के 25 ठिकानों पर ईओयू-एसटीएफ की संयुक्त छापेमारी
पटना/नालंदा। बिहार में भू-माफियाओं, अवैध संपत्ति अर्जित करने वाले अपराधियों और संगठित रंगदारी गिरोहों के खिलाफ जांच एजेंसियों ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में शनिवार को आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने खुसरूपुर के चर्चित एवं कथित भू-माफिया संजय कुमार उर्फ संतोष डॉन के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करते हुए एक साथ 25 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पटना, नालंदा और आसपास के कई क्षेत्रों में एक साथ चलायी गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। दर्जनों वाहनों के काफिले और भारी पुलिस बल के साथ पहुंची विशेष टीमों ने संबंधित गांवों और परिसरों की घेराबंदी कर घंटों तक तलाशी अभियान चलाया।
पैतृक गांव से लेकर आलीशान परिसरों तक जांच
जांच एजेंसियों की टीम ने नालंदा जिले के रहुई प्रखंड स्थित खिदरचक और पचासा गांव में संतोष डॉन के पैतृक आवासों की तलाशी ली। इसके अलावा उसके कथित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, आलीशान भवनों और बेनामी संपत्तियों से जुड़े ठिकानों को भी खंगाला गया। सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में भूमि से जुड़े दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्ति संबंधी कागजात और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों के स्रोत और उनके स्वामित्व की जांच कर रही हैं।
जदयू नेता के आवास पर भी पहुंची टीम
कार्रवाई के दौरान पचासा गांव स्थित एक जनप्रतिनिधि और सत्तारूढ़ दल जदयू से जुड़े नेता नीतीश कुमार के आवास पर भी जांच टीम पहुंची। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक किसी प्रकार के आपराधिक या वित्तीय संबंधों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। स्थानीय स्तर पर संतोष डॉन और कुछ प्रभावशाली लोगों के बीच संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन जांच एजेंसियां फिलहाल तथ्यों के आधार पर ही आगे बढ़ रही हैं।
पैक्स अध्यक्ष और प्रमुख पति होने से बढ़ा प्रभाव
संतोष डॉन का स्थानीय राजनीति और पंचायत व्यवस्था में भी प्रभाव बताया जाता है। वह वर्तमान में सुकरबेगचक पंचायत का पैक्स अध्यक्ष है तथा प्रखंड प्रमुख का पति भी है। इसी कारण क्षेत्र में उसकी पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। उसके खिलाफ वर्षों से गरीब किसानों की जमीन कब्जाने, फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूमि हस्तांतरण कराने, सरकारी एवं निजी जमीन पर अवैध कब्जा करने, रंगदारी वसूली और विरोध करने वालों को धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं। कई मामलों में उसके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
बेनामी संपत्तियों की पड़ताल
ईओयू और एसटीएफ की टीम खुसरूपुर के पचरुखिया, जगमालबीघा, सुकरबेगचक, मुस्तफापुर, चौड़ा समेत विभिन्न इलाकों में स्थित कथित बेनामी संपत्तियों की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का मानना है कि वर्षों के दौरान अवैध तरीके से अर्जित धन को भूमि, भवन और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए संपत्ति के कागजातों की गहन जांच की जा रही है।
संगठित अपराध के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में सक्रिय संगठित अपराध और अवैध संपत्ति नेटवर्क के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान का हिस्सा है। पटना, नालंदा, मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में अपराधियों और उनके सहयोगियों के आर्थिक नेटवर्क की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की जब्ती, मनी ट्रेल की जांच तथा संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इलाके में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
एक साथ 25 ठिकानों पर हुई इस बड़ी छापेमारी के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग इसे भू-माफियाओं और संगठित अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मान रहे हैं। वहीं जांच एजेंसियों ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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