बिहार के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 26 हजार से अधिक पदों पर होगी बहाली, उच्च शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
पटना। बिहार के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में वर्षों से खाली पड़े शिक्षकों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के पदों को भरने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी पहल शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के 13 विश्वविद्यालयों के अधीन संचालित कॉलेजों में बड़े पैमाने पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार की इस पहल से उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।
शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी दूर करने की तैयारी
उच्च शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षकों तथा कर्मचारियों की भारी कमी है। लंबे समय से नियमित नियुक्तियां नहीं होने के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार ने रिक्त पदों की पहचान कर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक कॉलेजों में शिक्षकों के कुल 12,411 स्वीकृत पद हैं, जबकि वर्तमान में केवल 5,800 शिक्षक कार्यरत हैं। इस प्रकार 6,611 पद खाली हैं, जो कुल स्वीकृत पदों का लगभग 55 प्रतिशत है। इसी तरह गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के 16,557 स्वीकृत पदों में से केवल 5,583 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 10,974 पद रिक्त पड़े हुए हैं। यानी इस वर्ग में लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं।
17 हजार से अधिक रिक्त पदों पर होगी बहाली
सरकार की योजना के तहत सबसे पहले रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अंतर्गत करीब 6,600 शिक्षकों और व्याख्याताओं की नियुक्ति होगी, जबकि 11 हजार से अधिक गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की बहाली की जाएगी। शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति होने से कॉलेजों में नियमित कक्षाओं का संचालन, परीक्षा कार्यों का समय पर निष्पादन तथा प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे वर्षों से संसाधनों की कमी से जूझ रहे उच्च शिक्षण संस्थानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
211 नए डिग्री कॉलेज खोलने की तैयारी
उच्च शिक्षा की पहुंच को गांव और प्रखंड स्तर तक बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कॉलेज विहीन प्रखंडों में 211 नए डिग्री कॉलेज स्थापित करने की योजना बनाई है। इन कॉलेजों के संचालन के लिए अलग से शिक्षकों और कर्मचारियों के पद भी सृजित किए जाएंगे। सरकार ने प्रत्येक नए कॉलेज में 44 पदों के सृजन को मंजूरी दी है। इनमें 32 शिक्षक पद और 12 गैर-शैक्षणिक पद शामिल होंगे। इस प्रकार 211 नए कॉलेजों के लिए कुल 9,284 नए पदों का सृजन किया जाएगा। इन पदों में 6,752 शिक्षकों तथा 2,532 गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। यदि नए कॉलेजों के लिए सृजित पदों और वर्तमान रिक्तियों को जोड़ दिया जाए तो कुल नियुक्तियों की संख्या लगभग 26 हजार तक पहुंच जाएगी।
छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ
शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी का सबसे अधिक असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ता है। कई कॉलेजों में विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण नियमित कक्षाएं नहीं चल पातीं। वहीं कर्मचारियों की कमी से नामांकन, परीक्षा, प्रमाणपत्र वितरण और अन्य प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर होने वाली नियुक्तियों से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र नियमित होगा, परीक्षा परिणाम समय पर प्रकाशित होंगे और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने दी जानकारी
उच्च शिक्षा मंत्री संजय कुमार टाइगर ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण और नियमित शिक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि रिक्त पदों की पहचान कर ली गई है और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन प्रखंडों में अभी तक डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां नए कॉलेज स्थापित किए जाएंगे ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख न करना पड़े। नए कॉलेज खुलने से स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी और बड़ी संख्या में युवाओं को इसका लाभ मिलेगा।
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