बिहार में बाढ़ का विकराल रूप, 12 जिलों में 17 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; पटना-गया रेलखंड पर ट्रेनें रद्द
पुनपुन नदी ने तोड़ा 50 साल का रिकॉर्ड, गंगा भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर; राहत-बचाव के लिए 858 नावें मैदान में
पटना। बिहार में लगातार बढ़ रहे नदियों के जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। गंगा, पुनपुन, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक और घाघरा समेत कई नदियां उफान पर हैं। बाढ़ का असर अब सड़क और गांवों के साथ-साथ रेल परिचालन पर भी दिखाई देने लगा है। पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण पटना-गया रेलखंड की डाउन लाइन को बंद करना पड़ा है। राज्य में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ की चपेट में हैं और प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार शनिवार तक राज्य के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में करीब 10.26 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित थी। वहीं, अन्य इलाकों में भी स्थिति बिगड़ने के कारण प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं।
858 नावों से कराया जा रहा लोगों का सुरक्षित आवागमन
बाढ़ प्रभावित और विस्थापित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए राज्य के अलग-अलग इलाकों में 858 नावें चलाई जा रही हैं। प्रभावित परिवारों को जरूरत की सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 12 हजार से ज्यादा पॉलीथीन शीट और लगभग 2,300 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।
38 सामुदायिक रसोई में मिल रहा गर्म भोजन
बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न जिलों में 38 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों से अब तक करीब 1.21 लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 50 मेडिकल कैंप, 19 बोट एंबुलेंस और 36 पशु चिकित्सा शिविर भी चलाए जा रहे हैं।
वैशाली में राहत शिविर, 326 लोगों के रहने की व्यवस्था
वैशाली जिले में एक राहत शिविर संचालित किया जा रहा है। यहां करीब 326 बाढ़ प्रभावित लोगों के रहने, भोजन और इलाज की व्यवस्था की गई है। संभावित स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की 7 और एसडीआरएफ की 27 टीमें भी अलग-अलग प्रभावित जिलों में तैनात हैं।
गंगा कई जगह खतरे के निशान से ऊपर
पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया है। बंका घाट पर 49.45 मीटर और पंडारक में 43.79 मीटर जलस्तर रिकॉर्ड किया गया। कई स्थानों पर गंगा का पानी सर्वोच्च बाढ़ स्तर से भी ऊपर पहुंच गया है। बक्सर से लेकर मुंगेर तक गंगा के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है।
सारण में तटबंध क्षतिग्रस्त, मौके पर पहुंची SDRF
सारण जिले में माही नदी के त्रिलोकचक के पास करीब 20 मीटर तटबंध क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। स्थिति को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम को मौके पर भेजा गया है। वहीं, वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक का डिस्चार्ज करीब 1.26 लाख क्यूसेक, वीरपुर बराज पर कोसी का 1.77 लाख क्यूसेक और इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का 3.07 लाख क्यूसेक जलस्राव दर्ज किया गया।
पटना में जलनिकासी के लिए लगाए गए अतिरिक्त पंप
राजधानी पटना में भी कई इलाकों में जलजमाव की समस्या बनी हुई है। जलनिकासी के लिए सभी 56 डीपीएस चालू कर दिए गए हैं। इसके अलावा नगर निगम के छह अंचलों में 94 अतिरिक्त पंप लगाए गए हैं। मौसम विभाग की ओर से अगले दो दिनों में राज्य के कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताए जाने के बाद प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।
पुनपुन नदी ने तोड़ा 50 साल का रिकॉर्ड
पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार के अनुसार नदी का जलस्तर 53.28 मीटर तक पहुंच गया है, जो वर्ष 1976 के बाद सबसे अधिक बताया जा रहा है। पुनपुन प्रखंड की बरावां, लखन उत्तरी, लखन पश्चिमी, श्रीपालपुर और अकौना पंचायतों के कई गांव पानी से घिर गए हैं। सड़कों और तटबंधों पर भी बाढ़ का असर पड़ा है।
घर डूबे, खुले में रहने को मजबूर ग्रामीण
पुनपुन क्षेत्र में बाढ़ ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई परिवारों के घर क्षतिग्रस्त होने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थानों की तलाश करनी पड़ रही है। गांवों का संपर्क टूटने के कारण लोगों को खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी तेजी से बढ़ने के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है और कई परिवार खुले स्थानों या ऊंचे इलाकों में रहने को मजबूर हैं।
पटना-गया रेलखंड पर बंद की गई डाउन लाइन
पुनपुन नदी का पानी बढ़ने के कारण पटना-गया रेलखंड पर भी संकट गहरा गया है। पुनपुन घाट के रेल पुल संख्या-21 के पास पानी डाउन लाइन के ट्रैक और पुल के गार्डर तक पहुंच गया। सुरक्षा को देखते हुए 4 सितंबर की रात करीब 8:10 बजे से डाउन लाइन को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। फिलहाल अप लाइन से ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
10 मेमू ट्रेनें रद्द, कई एक्सप्रेस के बदले रूट
रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पटना और गया के बीच चलने वाली करीब 10 मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इनमें 63242, 63244, 63245, 63247, 63248, 63250, 63251, 63253, 63256 और 63274 शामिल हैं। इसके अलावा धनबाद-पटना, पटना-धनबाद, बनारस-राजगीर और राजगीर-बनारस समेत कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया जा रहा है।
जलस्तर और बढ़ा तो अप लाइन भी हो सकती है बंद
पुनपुन स्टेशन के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल कुछ ट्रेनों को अप लाइन से संचालित किया जा रहा है। रेलवे पुल और ट्रैक की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि यदि पुनपुन नदी का जलस्तर और 30 से 40 सेंटीमीटर बढ़ता है, तो सुरक्षा कारणों से अप लाइन पर भी परिचालन रोकना पड़ सकता है।
गंगा से बैकफ्लो रोकने की कवायद तेज
बाढ़ के पानी की निकासी को बेहतर बनाने के लिए जल संसाधन विभाग ने पटना और दानापुर कैनाल में डिस्चार्ज कम करने की प्रक्रिया शुरू की है। गंगा का पानी नालों के रास्ते शहर में वापस न आए, इसके लिए 13 छोटे नालों के स्लूस गेट बंद किए गए हैं। जलनिकासी के लिए कई स्थानों पर पंप सेट भी लगाए जा रहे हैं।
लखीसराय में डीएम ने बाढ़ प्रभावित गांवों का लिया जायजा
लखीसराय के डीएम शैलेन्द्र कुमार ने पिपरिया प्रखंड के कई बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने मुडवरिया, पिपरिया डीह, ओलीपुर, रामचंद्रपुर, मोहनपुर और खुटहाडीह समेत विभिन्न क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लिया। डीएम ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सुविधा, नाव, पशुओं के लिए चारा और बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पहुंचाने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य केंद्रों को तत्काल चालू करने के निर्देश
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन ने निर्देश जारी किए हैं। बंद पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को तत्काल चालू करने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को समय पर इलाज मिल सके। राहत कार्य में लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
17 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में
राज्य के ताजा आंकड़ों के अनुसार गंगा और पुनपुन की बाढ़ से 12 जिलों में 17 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जबकि दीघा घाट पर भी जलस्तर 51.99 मीटर तक पहुंचा। पुनपुन नदी का जलस्तर अरवल में 67.18 मीटर और श्रीपालपुर में 53.42 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से काफी ऊपर है।
प्रशासन हाई अलर्ट पर, राहत-बचाव अभियान जारी
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। तटबंधों और पुलों की लगातार जांच की जा रही है। राहत सामग्री, भोजन, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखना है।
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