पटना में आरक्षण आंदोलन पर पुलिस का लाठीचार्ज: पासवान समाज के 12 सूत्री मांगों के साथ विधानसभा मार्च के दौरान हिंसा

पटना में आरक्षण आंदोलन पर पुलिस का लाठीचार्ज: पासवान समाज के 12 सूत्री मांगों के साथ विधानसभा मार्च के दौरान हिंसा

पटना। पटना में मंगलवार को एक बार फिर आरक्षण को लेकर आंदोलन करने वाले पासवान समाज के लोगों पर पुलिस का लाठीचार्ज हुआ, जिसमें कई लोग घायल हो गए। यह घटना तब हुई जब पासवान समाज के सदस्य अपनी 12 सूत्री मांगों के साथ विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। इस मार्च का नेतृत्व पासवान समाज के प्रमुख नेताओं ने किया, जो आरक्षण समेत अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे थे।

आंदोलन का प्रारंभ और पुलिस के साथ टकराव

मार्च की शुरुआत कारगिल चौक से हुई, जहां हजारों लोग नीले झंडे, डंडे और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाएं लेकर पहुंचे थे। जैसे ही ये लोग विधानसभा की ओर बढ़ने लगे, पुलिस ने जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया। यहीं पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

लाठीचार्ज और उसकी प्रतिक्रिया

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लौटने का आदेश दिया, लेकिन जब उन्होंने आदेश नहीं माना, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसमें कई लोग घायल हो गए। सीडीपीओ लॉ एंड ऑर्डर कृष्ण मुरारी प्रसाद ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को इस मार्च के लिए अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया।

प्रशासन का पक्ष

पटना सदर एसडीएम श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर ने दावा किया कि लाठीचार्ज नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पहले राहगीरों की गाड़ियों पर हमला किया था, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए कार्रवाई की। उन्होंने यह भी कहा कि हिरासत में लिए गए 4-5 लोगों को प्रदर्शन के दौरान अपनी ही लाठी से चोट लगी थी।

राजनीतिक और सामाजिक असर

इस घटना के बाद से पासवान समाज में रोष व्याप्त है। समाज के नेताओं ने सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से राज्य में सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है, जिससे आगामी चुनावों में भी असर पड़ सकता है।

मांगें और उनकी प्रासंगिकता

पासवान समाज के 12 सूत्री मांगों में आरक्षण की व्यवस्था को बनाए रखना, शैक्षणिक और रोजगार के अवसरों में सुधार, और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष योजनाओं का प्रावधान शामिल हैं। इन मांगों को लेकर वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, और उनका कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।

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साकेत कुमार, BJMC 

उप-सम्पादक

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