एनडीए सांसदों की ‘मंगल मिलन’ बैठक कल , संसद से जुड़े मुद्दों पर होगी चर्चा; पीएम मोदी की नसीहतों पर भी रहेगा जोर
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक मंगलवार, 11 अगस्त को संसद भवन परिसर में आयोजित होगी। बैठक सुबह 9:30 बजे संसद भवन के पुस्तकालय स्थित जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में होगी। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के एनडीए सांसदों के शामिल होने की संभावना है। बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सांसदों को दिए गए सुझाव भी चर्चा में महत्वपूर्ण रहेंगे। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को अपने आवास पर एनडीए के करीब 41 लोकसभा सांसदों के साथ नाश्ते पर संवाद किया था। इस दौरान उन्होंने सांसदों को स्वास्थ्य, संसदीय मर्यादा, जनसेवा और व्यक्तिगत एवं सरकारी जिम्मेदारियों के बीच बेहतर संतुलन बनाने की सलाह दी थी।
प्रधानमंत्री ने सांसदों के स्वास्थ्य को जनसेवा से जोड़ते हुए नियमित योग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और मन के साथ सांसद जनता के लिए ज्यादा प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। उन्होंने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद कुछ मिनट योग के लिए निकालने की बात कही। प्रधानमंत्री के अनुसार, यात्रा या काम के दौरान भी कुर्सी पर बैठकर कुछ समय योग किया जा सकता है।
नए सांसदों को संसदीय कार्यप्रणाली समझने के लिए प्रधानमंत्री ने संसद के इतिहास का अध्ययन करने और संसद पुस्तकालय का अधिकतम उपयोग करने को कहा। उन्होंने संसद को एक विश्वविद्यालय की तरह बताते हुए सांसदों को इससे सीखने और संसदीय परंपराओं की गहरी समझ विकसित करने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने सांसदों से उनके राज्यों और निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सीधे संवाद करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि एनडीए एक परिवार की तरह काम करता है और जनता का कल्याण उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री ने सांसदों को संसदीय बहस के दौरान संयम बरतने और सदन के भीतर के तनाव को बाहर नहीं ले जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर अपनी बात शांतिपूर्वक और तथ्यों के साथ रखी जानी चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखना भी संसदीय कार्यशैली का हिस्सा है। मीडिया से बातचीत को लेकर भी प्रधानमंत्री ने सांसदों को सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि टेलीविजन या अन्य माध्यमों पर गुस्से में बयान देने अथवा अनावश्यक रूप से ऊंची आवाज में बोलने से बचना चाहिए। सांसदों को पार्टी की नीति और विचारधारा के अनुरूप हर विषय पर गरिमा के साथ अपनी बात रखने की सलाह दी गई। प्रधानमंत्री ने जिम्मेदारियों के बीच संतुलन को लेकर अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वह जिस समय जिस काम में होते हैं, उस पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करते हैं। उनका संदेश था कि सांसद भी वर्तमान जिम्मेदारी पर पूरा ध्यान देकर बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।
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