प्रशांत किशोर ने ली बिहार विधानसभा सदस्यता की शपथ, बोले- सदन का सदस्य बनना गौरव की बात
बांकीपुर उपचुनाव में करीब 20 हजार वोटों से मिली जीत
पटना। जन सुराज के संयोजक और बांकीपुर से नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर ने सोमवार को बिहार विधानसभा की सदस्यता की शपथ ली। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार विधानसभा जैसे ऐतिहासिक सदन का सदस्य बनना उनके लिए गौरव के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। शपथ लेने के बाद मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस सदन के सदस्य जननायक भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर, श्रीकृष्ण सिंह, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान, केदार पांडेय और सुशील मोदी जैसे नेता रहे हैं, उस सदन का सदस्य बनना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सदन में उनसे पहले सैकड़ों लोगों ने समाज और बिहार की बेहतरी के लिए अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष लगाए हैं। उनसे प्रेरणा लेकर वह भी बिहार और समाज की बेहतरी के लिए काम करने का प्रयास करेंगे।
प्रशांत किशोर ने हाल ही में हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन के राज्यसभा जाने से बांकीपुर सीट खाली हुई थी। इसके बाद 30 जुलाई को उपचुनाव कराया गया और 3 अगस्त को परिणाम घोषित हुआ। उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने एनडीए उम्मीदवार को करीब 20 हजार वोटों के अंतर से हराकर विधानसभा में प्रवेश किया। इस जीत से पहले प्रशांत किशोर ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी जन सुराज के उम्मीदवारों को 243 सीटों पर चुनाव मैदान में उतारा था। हालांकि, पार्टी को किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। उस समय खुद प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं थीं, लेकिन उन्होंने किसी सीट से चुनाव नहीं लड़ा था। बांकीपुर उपचुनाव में उन्होंने खुद मैदान में उतरकर जीत हासिल की और अब विधानसभा पहुंच गए हैं।
जन सुराज के फिलहाल विधानसभा में प्रशांत किशोर अकेले विधायक हैं। ऐसे में सदन में पार्टी की आवाज वही उठाएंगे। सरकार की नीतियों और बिहार से जुड़े मुद्दों पर प्रशांत किशोर पहले से ही लगातार सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा सत्र में वह सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरते हुए अपनी बात मजबूती से रख सकते हैं। उनके विधानसभा में प्रवेश के बाद सदन की राजनीति में एक नया और मुखर स्वर देखने को मिल सकता है।
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