गोवर्धन धाम पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, पारंपरिक 7 कोस परिक्रमा कर लिया आशीर्वाद
मथुरा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मथुरा-वृंदावन दौरा शनिवार को आस्था और आध्यात्मिकता के विशेष रंग में नजर आया। अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति गोवर्धन धाम पहुंचीं, जहां उन्होंने पारंपरिक 7 कोस गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर देश की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर वे गोवर्धन पहुंचने वाली देश की पहली राष्ट्रपति भी बन गईं, जिसे एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति ने गोवर्धन पहुंचने के बाद विशेष वाहन (बैटरी चालित कार) के माध्यम से परिक्रमा आरंभ की। परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। रास्ते में श्रद्धालुओं ने राष्ट्रपति का अभिवादन किया और धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। परिक्रमा पूर्ण करने के बाद राष्ट्रपति नई दिल्ली के लिए रवाना होंगी।
इससे पूर्व राष्ट्रपति ने वृंदावन स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में नंद किशोर सोमानी कैंसर चिकित्सा केंद्र का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण परमहंस की भक्ति और उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद के प्रयासों ने इस मिशन को मानव सेवा के एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित किया है।
राष्ट्रपति ने अपने दौरे के दौरान मथुरा में स्थित इस्कॉन मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया और संध्या आरती में भाग लिया। वहां का आध्यात्मिक वातावरण और भक्तिमय माहौल उनके दौरे को और भी विशेष बना गया।
इसके अलावा राष्ट्रपति वृंदावन के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम पहुंचीं, जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से भेंट कर आध्यात्म, सेवा और समाज कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की। आश्रम में उनके स्वागत के लिए पारंपरिक व्यवस्था की गई थी और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया।
राष्ट्रपति ने साध्वी ऋतंभरा द्वारा स्थापित ‘वात्सल्य ग्राम’ का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां रह रहे बच्चों और बुजुर्गों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और संस्थान द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास समाज के कमजोर वर्गों के लिए आशा की किरण हैं।
राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा रहा, बल्कि इसमें सेवा, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का भी स्पष्ट संदेश देखने को मिला। उनके इस कार्यक्रम ने यह दर्शाया कि आध्यात्मिकता और समाज सेवा साथ-साथ चलकर देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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